आसान नही है चार धाम यात्रा सुनिश्चित करना

हेमंत

रुद्रप्रयाग,गंगोत्री और यमुनोत्री यात्रा संचालन में इस बार अफसरों के सामने बड़ी चुनौती व्यवस्थाओं को समझने की रहेगी। डीएम और एसपी की नई पोस्टिंग के अलावा कई अधीनस्थ अफसर भी पहली बार यात्रा से जुड़े कार्य देखेंगे। ऐसे में बजट और अन्य संसाधन जुटाने में खासा पसीना बहाना पड़ सकता है। यात्रा से जुड़े इंतजाम जुटाने में इस बार अफसरों को मुश्किलों से जूझना पड़ सकता है। केदारनाथ यात्रा शुरू होने से पहले पैदल मार्ग को तैयार करना अफसरों के लिए चुनौती बना है। केदारनाथ यात्रा शुरू होने से पहले विभिन्न विभागों के अफसरों को डीएम ने 30 अप्रैल तक का समय दिया है। ऐसे में अफसरों को समय पर काम पूरा करने का दबाव है।

हालांकि पैदल मार्ग पर लगातार काम चल रहा है, किंतु पैदल मार्ग में पड़े ग्लेशियर काटकर रास्ता बनाने में काफी दिक्कतें पेश आ रही हैं।इस बार केदारनाथ यात्रा के लिए सोनप्रयाग से गौरीकुंड तक हाईवे को ठीक कर दिया गया है। यहां उम्मीद जतायी जा रही है कि गौरीकुंड तक वाहन जा सकेंगे। गौरीकुंड से 17 किमी पैदल मार्ग में कई स्थान खतरनाक हैं। यहां से सामान केदारनाथ पहुंचने में अफसरों को काफी परेशानियां उठानी पड़ रही हैं। यही नहीं जल संस्थान के साथ ही पूर्ति, जीएमवीएन, बीकेटीसी आदि विभागों को सामान पहुंचाने में दिक्कतें हो रही हैं।

केदारनाथ यात्रा मार्ग में अभी रहने और खाने की व्यवस्थाएं भी नहीं हैं, जिस कारण एडवांस टीमें केदारधाम पहुंचकर व्यवस्थाएं जुटा रही हैं। पैदल मार्ग पर रामबाड़ा तक डीडीएमए काम कर रहा है। कई स्थानों पर ग्लेशियर टूटे हैं बर्फ काटने में जोखिमों के बीच काम करना पड़ रहा है। हालांकि लिंचौली से केदारनाथ तक नेहरू पर्वतारोहण संस्थान ने मार्ग को बेहतर बनाया है, किंतु कई स्थानों पर बर्फ के बीच जाने में फिसलन है जिस कारण यात्रा तैयारियों में अफसरों को दिक्कतें आ रही हैं।  राष्ट्रपति शासन में प्रशासन के रुख के आगे प्लांट का विरोध करने वाले मौन है।

 

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