इशरत केस पर सियासत तेज, राज्य सभा में हंगामा

 

नई दिल्ली, राज्यसभा मे आज का दिन इशरत के नाम रहा। कांग्रेस, अन्नाद्रमुक आदि दलों के सदस्यों के हंगामे के कारण राज्यसभा की बैठक एक बार के स्थगन के बाद दोपहर बारह बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई है।
भाजपा सांसद भूपेंद्र यादव ने इशरत जहां केस में हो रहे खुलासों पर राज्य सभा में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव का नोटिस दिया है। उधर संसदीय कार्य मंत्री वेंकैया नायडू ने कहा कि इस मामले पर पूर्व पीएम मनमोहन सिंह और तत्कालीन गृह मंत्री को बयान देना चाहिए। कांग्रेस ने पूछा कि क्या मोदी सरकार दोषी पुलिसकर्मियों के अभियोजन को रोकने के लिए मामले में हस्तक्षेप कर रही है। कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक सिंघवी ने भाजपा पर अमेरिकी-पाकिस्तानी आतंकवादी डेविड हेडली के बारे में झूठ प्रचारित करने का आरोप लगाया और कहा कि बहुत दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि सत्तारूढ़ पार्टी दुष्प्रचार कर रही है। पूरी कांग्रेस का रुख था कि दोष साबित होने के बाद भी किसी दोषी व्यक्ति की हत्या नहीं की जा सकती या कानून की उचित प्रक्रिया के बिना उसे मारा नहीं जा सकता जो कि गुजरात में मोदी के निरंकुश शासन के दौरान हुआ था। सिंघवी ने कहा कि तत्कालीन राज्य सरकार ने इसे उच्च न्यायालय में चुनौती दी लेकिन निष्फल रही।

दूसरी तरफ रविशंकर प्रसाद ने कहा कि कथित फर्जी मुठभेड़ में सीबीआई जांच पर सवाल खड़ा किया और कहा कि केंद्र सरकार की मशीनरी का दुरुपयोग किया गया था।

गौरतलब है कि गृह मंत्रालय में अवर सचिव रहे आर वी एस मणि के एक साक्षात्कार से यह बहस शुरू हुई जिन्होंने दो हलफनामे दाखिल किये थे। इंटरव्यू में मणि ने आरोप लगाया कि उन्हें मामले में वरिष्ठ आईबी अधिकारियों को फंसाने के लिए प्रताड़ित किया गया था, ताकि यह पेश किया जा सके कि इशरत और अन्य तीन लश्कर आतंकवादियों के साथ 2004 में अहमदाबाद में हुई मुठभेड़ फर्जी थी।मणि का कहना था कि दूसरा हलफनामा दाखिल करने के फैसले के पीछे चिदंबरम थे।यह बात ऐसे समय में सामने आई जब दो पूर्व गृह सचिवों ने दावा किया कि उच्चतम न्यायालय में दूसरा हलफनामा तत्कालीन गृह मंत्री पी चिदंबरम के कहने पर दाखिल किया गया था।

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